Input Output Trends In Hindi जाने क्या हैं Input Output Trends हिंदी में

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Input Output Trends In Hindi – जाने क्या हैं Input Output Trends हिंदी में


Input Output Trends In Hindi हेल्लो Engineers कैसे हो , उम्मीद है आप ठीक होगे और पढाई तो चंगा होगा आज जो शेयर करने वाले वो Operating System के Input Output Trends के बारे में हैं

तो यदि आप जानना चाहते हैं की Input Output Trends In Hindi  क्या हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं , और अगर समझ आ जाये तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं


Computer की तीन प्रमुख jobs हैं  Input, Output, and Processing |
बहुत सारे मामलों में, सबसे महत्वपूर्ण काम Input , Output है  Processing simply incidental (बस आकस्मिक) है |

उदाहरण के लिए, जब आप किसी web page को browse करते हैं या किसी फ़ाइल को Edit  करते हैं, तो हमारा immediate attention (तात्कालिक ध्यान)  किसी information को पढ़ना या  enter  करना होता है, न कि किसी उत्तर की Compute  (गणना) के लिए। Computer  Input /Output में Operating System का Primary Role  I / O  operations और सभी I / O devices को manage और Organize  करना है |
इस अध्याय में, आप Operating System से संबंधित Input , Output devices के विभिन्न Uses  के बारे में जानेंगे।


Overview of  Input / Output System

विभिन्न devices को Control  करना जो कंप्यूटर से जुड़े हैं, operating-system designers की एक प्रमुख चिंता है | उसका कारण यह है कि I / O उपकरण अपनी functionality and speed में व्यापक रूप से अलग  होते हैं (उदाहरण के लिए एक माउस, एक हार्ड डिस्क और एक CD-ROM), उन्हें नियंत्रित करने के लिए विभिन्न तरीकों की आवश्यकता होती है | ये विधियाँ OS के Kernel (Heart Of Operating System)  के  I/O sub-system का निर्माण करती हैं जो कि I/O devices की management  की complications से शेष Kernel  को अलग करती हैं।


Input / Output Hardware 

कंप्यूटर कई प्रकार के devices को operate करते हैं| storage devices का  general categories Disks, tapes, transmission devices ( जैसे  network interface cards, modems) और human interface devices (जैसे  screen, keyboard, आदि )

कोई भी डिवाइस के साथ communicates करता हैं अपने signals को Transfer करके किसी cable या Wireless Medium के जरिये |
peripheral devices connection point (Port)  के माध्यम से मशीन के साथ communicate करते हैं जिसे पोर्ट भी कहा जाता है
जब devices तारों या केबलों के एक सेट का उपयोग करते हैं, तो connecting cables को “Bus”कहा जाता है।
एक Bus तारों का एक Collection होता  है और एक firmly defined protocol  है जो संदेशों के
एक सेट को specifies करता है जिसे तारों पर भेजा जा सकता है।


Operating System Using I/O Port

I / O पोर्ट में आमतौर पर चार अलग-अलग रजिस्टर होते हैं। ये (1) status (2) control (3) data-in
(4) data-out registers

  • Input  पाने के लिए Host द्वारा डेटा-इन Register  Read किया  जाता है।
  • Output  भेजने के लिए Hos द्वारा डेटा-आउट Register Written किया  जाता है।
  •  status register bits को रखता है जिसे Host द्वारा Read किया जा सकता है।
  • control register Host  द्वारा Command  शुरू करने या किसी भी Device  के Mode  को बदलने के लिए लिखा जाता है।
  • data registers आमतौर पर आकार में 1 से 4 Bytes के होते हैं।
  • Controllers में से कुछ में FIFO चिप्स होते हैं जो डेटा रजिस्टर के आकार से परे controller की
    capacity का विस्तार करने के लिए इनपुट या आउटपुट डेटा के कई बाइट्स रखते हैं।

Polling 

Polling  एक ऐसी Process  है, जिसमें computer या  controlling device External Device के अपनी readiness या  state की जांच करने के लिए Wait  करता है | उदाहरण के लिए, जब एक प्रिंटर एक parallel port के माध्यम से जुड़ा होता है, तो कंप्यूटर इंतजार करता है जब तक कि प्रिंटर को next character नहीं मिलता  है | ये Process  केवल एक Bit  पढ़ने के रूप में Minute तक के रूप में हो भी  सकती है | इसका प्रयोग कभी कभी “Busy – Wait Polling” में किया जाता हैं | 

होस्ट एक पोर्ट के माध्यम से आउटपुट को चिह्नित करता है,कंट्रोलर का उपयोग करके हैंडशेकिंग की तरह:-

  • host aur controller se interact karne ke liye use kiya jaane wala
    complete protocol OS ke liye mushkil ho sakta hai
  •  par necessery hanshaking(start up communication) notion(concept) simple hai handshaking ka example maan lete hain ki controller aur host ke beech producer – consumer ka sambandh banane ke liye 2 bits ka use karte hain
  • controller status register me busy bit ka use karke apna status show karta hai
  • host baar baar busy bit read karte rahta hai jab tak busy bit free nhi ho jata
  • busy bit free hone par host command register me write bit set karta hai aur 1 byte data
    data-output register me likh deta hai uske baad host command ready bit set kar deta hai
  • controller command-ready bit notice karne ke baad busy bit set kar deta hai
  • कंट्रोलर uske baad command register read karta hai fir data-output register se byte read karta hai aur io operation karta hai
  • controller command ready bit ko clear kar deta hai uske baad io operation success indicate karne ke liye status register ke error bit ko clera karta hai


		

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