Setting Goals For Achievement In Hindi

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Labor Laws Related To Small Scale Industries In Hindi – हेल्लो Engineers कैसे हो , उम्मीद है आप ठीक होगे और पढाई तो चंगा होगा आज जो शेयर करने वाले वो Entrepreneurship  के  Setting Goals For Achievement In Hindi के बारे में हैं तो यदि आप जानना चाहते हैं की ये  क्या हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं , और अगर समझ आ जाये तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं |


Setting Goals For Achievement In Hindi

 उपलब्धि की सफलता हेतु कौन से घटक उत्तरदायी होते हैं:-

लक्ष्य प्राप्ति (Goal attainment) हेतु किसी व्यक्ति की सफलता उसके द्वारा निर्धारित लक्ष्य पर निर्भर करती है । किसी विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति हेतु पहला प्रमुख घटक होता है लक्ष्य का सही चुनाव । यदि लक्ष्य का चुनाव गलत किया गया है तो कितन ही प्रयास क्यों न कर लिये जायें सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती ।

अतः लक्ष्य निर्धारित करने से पूर्व निम्नलिखित घटकों को ध्यान में रखा जाना चाहिये

( i ) क्षमता (Capacity) –

किसी व्यक्ति के समक्ष कोई लक्ष्य रखने से पूर्व उसकी क्षमता तथा  शक्ति पर विचार करना चाहिये । यदि कोई व्यक्ति कोई कार्य विशेष करने में सक्षम नहीं है जो जो कदापि नहीं सौपा जाना चाहिये । यह सत्य है कि किन्ही विशेष प्रयासों द्वारा किसी व्यक्ति की क्षमता बढ़ाई जा सकती है किन्तु एक सीमा तक ही । अतः लक्ष्या से पूर्व व्यक्ति की क्षमता तथा योग्यता पर अवश्य विचार करना चाहिये ।

( ii ) संसाधन (Resources) –

जोखिम वहनकर्ताओं के मामले में उनके पास उपलब्ध संसाधन उनके लक्ष्य निर्धारण में विशेष भूमिका निभाते हैं । औद्योगिक इकाई स्थापित करने हेतु यदि कोई उद्यमी उत्सुक है तो सर्व प्रथम उसे उसके पास उपलब्ध संसाधनों पर विचार करना चाहिये । कोई उद्योग कोई निश्चित राशि का निवेश करके स्थापित किया जा सकता है परतु वह स्थापना के तुरंत बाद ही फलन नहीं देता । उत्पादन शुरु हो जाने बाद भी पर्याप्त मात्रा में पूँजी का होना आवश्यक होता है । अतः लक्ष्य निर्धारित करने से पूर्व उद्यमी को उसके पास उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखना चाहिये ।

( iii ) सामाजिक तथा नैतिक मूल्य (Social and moral values) –

सामाजिक तथा नैतिक मूल्यों की कीमत पर किसी भी लक्ष्य का निर्धारण नहीं करना चाहिये । ऐसे लक्ष्य का चयन करने से उद्यमी को सामाजिक तथा नैतिक सहयोग नहीं मिल पायेगा । मान लीजिये कोई व्यक्ति अवैध मदिरा का संयत्र स्थापित करना चाहता है तो उसे सामाजिक सहयोग तो मिलेगा ही नहीं बल्कि पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर उसे वैधानिक प्रक्रिया से भी गुजरना होगा ।

( iv ) पर्यावरण (Enviroment) –

यदि पर्यावरण अनुकूल हो तो कुछ विशेष प्रकार का लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है । इसके विपरीत पर्यावरणीय स्थितियों में कोई उद्योग विशेष स्थापित करना अर्थहीन होगा । उदाहरणार्थ मुम्बई या चैन्नई में ऊनी वस्त्र बेचना व्यर्थ है ।

( v ) राष्ट्रीय हित (National interest) –

यदि निर्धारित लक्ष्य राष्ट्र के हित में है तो उद्यमी पर सुविधाओं , प्रेरणाओं तथा अनुष्ठानों की बौछार सी हो जायेगी । उसे भरपूर राजकीय सहायता प्राप्त होगी तथा वह सफलतापूर्वक अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकेगा । इस प्रकार लक्ष्य निर्धारण से पूर्व राष्ट्र हित पर भी विचार करना चाहिये । उपलब्धि की सफलता हेतु उत्तरदायी घटक – उपलब्धि की सफलता हेतु अनेक घटक उत्तरदायी होते हैं ।

इनमें से प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं –

( i ) इच्छाशक्ति (Willpower) –

लक्ष्य की प्राप्ति हेतु व्यक्ति में इच्छाशक्ति होना उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण घटक है । जिस व्यक्ति में इच्छाशक्ति प्रबल है वह अवश्य ही अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकेगा । यह इच्छा शक्ति ही है जो व्यक्ति को ऐसे कार्य सफलतापूर्वक करने में सहायक होती है जो कभी उसे असंभव से प्रतीत होते थे । जब किसी व्यक्ति के कार्यो में असफलताओं की झड़ी सी लग जाती है तब उसका आत्मविश्वास ही उसे आन्तरिक बल तथा प्रेरणा देता है कि वह प्रयास जारी रखे तथा आगे बढ़ता ही जाये । अंततः उसे अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होती है । अतः लक्ष्य प्राप्ति हेतु इच्छाशक्ति का प्रबल होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है ।

( ii ) दृढ़ निश्चय (Determination) –

व्यक्ति को अपने प्रयासों में दृढ तथा अडिग रहना चाहिये । जब तक कि उद्देश्य पूर्ण नहीं हो जाता तब तक उसे अपने कार्य में निरंतर लगे रहना चाहिये । उसके मार्ग में कितनी ही बाधाएँ क्यों न आएँ उसे विचलित नहीं होना चाहिये । दृढ़ता अंततः लक्ष्य प्राप्त करा ही देती है । अतः इस घटक को अनदेखा नहीं करना चाहिये ।

( iii ) सामाजिक सम्पर्क (Social interaction) –

यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे समाज के लोगों के सम्पर्क में निरंतर रहना चाहिये । अनेक बार कुछ मामले सामाजिक मुद्दा बन जाते हैं तथा उसमें सामाजिक हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है । ऐसी दशा में व्यक्ति के सामाजिक सम्बन्ध बड़े उपयोगी सिद्ध होते हैं । इसके अतिरिक्त कुछ विशेष उददेश्यों की पूर्ति हेतु सामाजिक तथा नैतिक सहयोग आवश्यक होता है । ऐसे सभी मामलों में व्यक्ति की समस्या सुलझाने में समाज बड़ा सहायक होता है ।

( iv ) अनुकुलन (Adaptation) –

अनेक बार व्यक्ति की सफलता के मार्ग में उसका अहबाधक बन जाता है । वह किन्हीं विशेष तरीकों तथा पद्यतियों की उपयोगिता तथा महत्व को समझता है | पर उन्हें अपनाने में झिझकता है , उसका अहं उसे ऐसा करने से रोकता है । उसे डर होता | है कि कहीं लोग उसे नक्काल या नकलची न कहने लगें । एक विवेकशील व्यक्ति का व्यवहार ऐसा नहीं होना चाहिये । उसे स्वयं में अनुकूलन की भावना का विकास करना चाहिये । जहाँ भी आवश्यक हो उसे सही चीजों का चुनाव करना चाहिये तथा सही तरीकों को अपनाना चाहिये ।

 


Final Word

दोस्तों इस पोस्ट को पूरा पढने के बाद आप तो ये समझ गये होंगे की  Setting Goals For Achievement In Hindi और आपको जरुर पसंद आई होगी , मैं हमेशा यही कोशिस करता हूँ की आपको सरल भासा में समझा सकू , शायद आप इसे समझ गये होंगे इस पोस्ट में मैंने सभी Topics को Cover किया हूँ ताकि आपको किसी और पोस्ट को पढने की जरूरत ना हो , यदि इस पोस्ट से आपकी हेल्प हुई होगी तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं |

 

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