RAD model in hindi

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RAD( RAPID DEVELOPMENT MODEL ) MODEL IN HINDI

आज हम रेड मॉडल तथा इसके लाभ हानी के बारे में पड़ेंगे तो चलिए शुरू करते हैं:-

रेड मॉडल का पूरा नाम रैपिड एप्लीकेशन डेवलपमेंट मॉडल है, रेड मॉडल की कार्य विधि जो है वह इंक्रीमेंटल या वॉटरफॉल मॉडल की तरह ही सामान होती है इसका प्रयोग  छोटे प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है बजट बढ़ा है तो उसे बहुत सारे छोटे-छोटे प्रोजेक्ट में विभाजित कर लिया जाता है | प्रोजेक्ट की एक-एक करके प्लानिंग की जाती है तथा इन्हें पूरा किया जाता है | इस तरह छोटे-छोटे प्रोजेक्ट को पूरा करके बड़ा प्रोजेक्ट जल्दी तैयार हो जाता है |

RAD model में प्रोजेक्ट को दिए गए समय के अंदर पूरा किया जाता है तथा प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले सारी REQUIREMENT को इकट्ठा कर लिया जाता है रेड मॉडल में प्रोजेक्ट बहुत ही तेजी से पूरा होता है तथा इसमें errors भी बहुत ही कम होती है |

मॉडल का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में code,component tools ,process  को reuse करना है| रेड मॉडल के निम्नलिखित phases होती है :-

  1. बिजनेस मॉडलिंग(Business modeling)
  2. डाटा मॉडलिंग(data modeling)
  3. प्रोसेस मॉडलिंग(process modeling)
  4. एप्लीकेशन जेनरेशन (application generation)
  5. टेस्टिंग एंड टर्नओवर(Testing and Turnover)

 

1.बिजनेस मॉडलिंग (Business modeling) :- इस phase में बिजनेस मॉडल को विभिन्न बिजनेस गतिविधियों द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर डिजाइन किया जाता है | डेवलपमेंट का कार्य शुरू करने से पहले बिजनेस की पूरी जानकारी तथा functionality को भली-भांति analyze किया जाता है |

2.डाटा मॉडलिंग(data modeling) :- जब बिजनेस मॉडलिंग phase समाप्त हो जाता है मॉडलिंग से प्राप्त सूचना का प्रयोग डाटा ऑब्जेक्ट को define करने के लिए किया जाता है |

3.प्रोसेस मॉडलिंग(process modeling) :-  डाटा मॉडलिंग में जो डाटा ऑब्जेक्ट डिफाइन किए थे उन्हें इनफार्मेशन flow को प्राप्त करने के लिए ट्रांसफार्म(transform) कर दिया जाता है जिससे कि बिजनेस मॉडल के आधार पर कुछ विशेष बिजनेस goals को पूरा किया जा सके |

4.एप्लीकेशन जनरेशन(application generation) :- इस फेस में एप्लीकेशन को बना बनाया तथा कोडिंग की जाती है तथा ऑटोमेटिक टूल(automated tool) का प्रयोग सॉफ्टवेयर को बनाने तथा कोडिंग करने के लिए किया जाता है यह सब real टाइम में होता है |

5. टेस्ट एंड टर्नओवर(testing and turnover) :-  इसमें सभी interfaces तथा कॉम्पोनेंट्स को टेस्ट किया जाता है,  क्योंकि इसमें प्रोटोटाइप प्रत्येक चक्र में अलग test किए जाते हैं जिसके कारण RAD model में टेस्टिंग टाइम घट जाता है |

ADVANTAGE OF RAD MODEL ARE GIVEN BELOW :-

  1. यह डेवलपमेंट(development) में लगने वाले समय(time) को कम कर देता है |
  2. कंपोनेंट को रिव्यूज किया जाता है |
  3. यह flexible होता है तथा इसमें कोई भी changes  करना आसान है |
  4.  इसे script में transfer करना बहुत आसान है क्योंकि इसमें हाई लेवल अब्स्ट्रक्शन (high level abstraction) तथा इंटरमीडिएट कोर्स का प्रयोग किया जाता है |
  5. इसमें  डिफेक्ट(defect) बहुत ही कम होते हैं क्योंकि यह स्वभाव से ही prototype होता है |
  6.  इसे कम व्यक्तियों के साथ कम समय में प्रोडक्टिविटी को बढ़ाया जा सकता है |
  7. यह कॉस्ट इफेक्टिव(cost effective) होता है |
  8. छोटे प्रोजेक्ट के लिए सूटेबल(suitable) है |

DISADVANTAGE OF RAD MODEL ARE GIVEN BELOW :-

  1.  इसमें highly skill developer  तथा डिजाइनर की आवश्यकता होती है |
  2.  इसे manage  करना बहुत मुश्किल होता है |
  3.  यह लंबे समय तक चलने वाले तथा बड़े प्रोजेक्ट के लिए सही नहीं है |
  4.  इसमें प्रत्येक फेस के डेवलपमेंट(development) के साथ क्लाइंट(quality) के फीडबैक(feedback) की  जरूरत पड़ती है |
  5. ऑटोमेटिक कोड जेनरेशन(automated code generation) बहुत महंगा होता है|
  6.  यह मॉडल component based  तथा scalable  सिस्टम के लिए उपर्युक्त है |

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