Project Formulation In Hindi -जाने क्या है Project Formulation हिन्दी में

5/5 - (3 votes)

Project Formulation In Hindi  – हेल्लो Engineers कैसे हो , उम्मीद है आप ठीक होगे और पढाई तो चंगा होगा आज जो शेयर करने वाले वो Entrepreneurship  के  Project Formulation In Hindi  के बारे में हैं तो यदि आप जानना चाहते हैं की ये  क्या हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं , और अगर समझ आ जाये तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं |

Project Formulation In Hindi

Project Formulation In Hindi
Project Formulation In Hindi

Project Formulation In Hindi

परियोजना के निरुपण (Project formulation ) से आशय है परियोजना के हेतु एक चरणबद्ध योजना विकसित करना । इसमें निम्नलिखित चरण सम्मिलित होते हैं :-

Project Formulation in hindi
Project Formulation in hindi

Types of Project Formulation

( i ) Product or service selection – (उत्पाद या सेवा का चयन)

सर्वप्रथम उद्यमी को अपनी क्षमता के अनुरूप उत्पाद अथवा सेवा का चयन करना होता है । इसके लिये उस प्रश्नों के उत्तर जानने होते हैं –

  • मेरा उत्पाद किस आवश्यकता की पूर्ति करेगा ?
  • मेरे उत्पाद की क्या विशेषता है ?
  • मेरा उत्पाद उपभोक्ता की जो यह अभी नहीं कर सकता किन्तु उत्पादन के बाद कर को पूर्ति नहीं कर सकेगा ?
  • वह क्या है जो अभी नहीं कर सकता किन्तु उत्पादन के बाद कर सकेगा ?
  • क्या इसकी सफलता को सुनिश्चित करने हेतु मेरे पास योग्यता है ?
  • क्या मैं वास्तव में इस प्रकार का उद्योग चलाना चाहता हूँ क्या मैं ऐसा व्यक्ति बन सकता हूँ ?

( ii ) Market exploration (बाजार अन्वेषण)

परियोजना के निरुपण हेतु यह अत्यधिक आवश्यक चरण भी को निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर खोजने होते हैं –

  • मेरे ग्राहक कौन हैं ?
  • वे कहाँ है ?
  • उनकी औसत आय क्या है ?
  • वे कैसे खरीदते है ?
  • किस मूल्य पर खरीदते हैं ?
  • कितनी मात्रा में खरीदते हैं ?
  • कब खरीदते हैं ?
  • वे मेरे उत्पाद का उपयोग कब करेंगे ?
  • वे इसका उपयोग कहाँ करेंगे ?
  • वे इसे क्यों खरीदेंगे ?

( iii ) Sales revenue forecast (विक्रय राजस्व का पूर्वानुमान)

  • बाजार अध्ययन के बाद उद्यमी को इस बात का पूर्वानुमान लगाना होता है कि बाजार अंश का कितना प्रतिशत वह अर्जित कर सकता है ।
  • इसके लिये प्रतिस्पर्धियों की संख्या व आकार तथा उनके स्तर तक पहुँचने के लिये लगने वाला समय आदि का ध्यान रखना होता है । विक्रय राजस्व का वास्तविक आधारों पर अनुमान लगाना चाहिये न कि काल्पनिक आधारों पर ।

( iv ) Develop production plan (उत्पादन योजना विकसित करना )

  • सर्वप्रथम उद्यमी को यह तय करना होता है कि उद्योग का आकार क्या होगा । अनमान प्रतिवर्ष उत्पादन के आकार में हो तथा विक्रय पूर्वानुमान से तालमेल खाता हो ।
  • उद्यमी को उत्पादन प्रक्रिया भी नियोजित करनी चाहिये तथा उस प्रक्रिया में प्रयुक्त होने वाली मशीनें / उपकरणों का भी ध्यान रखा जाना चाहिये ।

( V ) Develop a market plan  (बाजार योजना विकसित करना )

  • उद्यमी के ग्राहक उत्पन्न करने हेतु भी plan बनानी होती है ।
  • बाजार नियोजन उत्पादक तथा रचनात्मक होना चाहिये । इसमें सोचना चाहिये कि वह विभिन्न अस्त्रों का प्रयोग किस प्रकार करेगा ? अर्थात् विपणन लिकाओ , कीमत , विज्ञापन , व्यक्तिगत विक्रय तथा विक्रय संवर्द्धन आदि का प्रयोग किस अकार करेगा ? विभिन्न प्रकार के उत्पादों के लिये आदर्श विपणन मिश्र एकदम अलग – अलग होते है ।

( vi) Developing a legal plan (वैधानिक योजना विकसित करना )

  • उद्यमी को यह निर्णय करना होता है कि निस स्वरूप को चुनेगा । एकल व्यवसाय , साझेदारी अथवा कम्पनी स्वरूप बाग चलाएगा ? प्रत्येक स्वरूप के अपनी लाभ – हानियाँ होती हैं । कौन सा होगा यह अनेक कारकों पर निर्भर होता है जैसे – प्राथमिकता , टैक्स , आदि ।
  • सर्वप्रथम उद्यमी को किसी अभिवक्ता से परामर्श लेने हेतु मिलना चाहिये । अभिवक्ता को नये उपक्रमों की स्थापना का विशेषज्ञ होना चाहिये ।
  • कानून तथा विधान द्वारा स्वीकृत अवसरों का लाभ उठाने हेतु कानूनी परामर्श लेना आवश्यक होता है ।

( vii )Developing an accounting plan ( लेखा योजना विकसित करना )

प्राय : उद्यमी अपने प्रतिष्ठान के लेखा पक्ष को अनदखा कर देते है । वे भूलवश विपणन तथा उत्पादन जैसे पक्षों के नियोजन पर अधिक बल देते है । उनके पास एक लेखापाल होना चाहिये । उन्हें उद्यम के क्रियान्वयन के पूर्व से ही अभिलेख रख – रखाव प्रणाली शुरु कर देनी चाहिये । एक नियमानुसार सर्वोत्तम अभिलेख पालन प्रणाली वह है जो-

  • उच्च यथार्थता सुनिश्चित करें ,
  • कम लागत पर चले ,
  • शीघ्रता से जानकारी दें ,
  • चोरी अथवा धोखाधड़ी की सम्भावना को न्यूनतम करे ।

लेखा विधि का निरुपण लेखापाल करता है किन्तु उपक्रम को नियोजित व नियंत्रित करने हेतु उद्यमी उस सूचना का प्रयोग करता है ।

( viii ) Developing insurance plans (बीमा योजना विकसित करना )

वित्तीय लेखा पालन की ही भाँति बीमा भी एक ऐसा तत्व है जिसकी उद्यमी अवहेलना करता है । इस प्रकार की अवहेलना जोखिमपूर्ण होती है । उन्हें अपने उपक्रम की रक्षा किसी अनसोची दुर्घटना जैसे आग , चोरी आदि से करनी चाहिये । उपक्रम के आरम्भ होने से पूर्व उन्हें जोखिम प्रबंध का कार्यक्रम विकसित करना चाहिये । इस योजना में निम्नलिखित जानकारियाँ होनी चाहिये –

  • लाम / हानि कहाँ हो सकती है ?
  • हानियाँ कितनी गम्भीर हो सकती है ?
  • इन जोखिमों से कैसे निपटा जा सकता है ?

इस संबंध में उद्यमी किसी बीमा एजेण्ट अथवा वकील की सहायता ले सकता है ।

( ix ) Computer Planning (कम्प्यूटर योजना तैयार करना)

परियोजना को सक्षमता पूर्वक नियोजित तथा नियंत्रित करने हेतु उद्यमी को कम्प्यूटर योजना विकसित करनी चाहिये जो=-

  • उपक्रम की आवश्यकता हेतु सूचना उपलब्ध कराये ।
  • उन लाभों को बताये जो कम्प्यूटर प्रणाली से प्राप्त हो सकते है ।
  • संभावित कम्प्यूटर प्रणाली का मूल्यांकन करे ।
  • कम्प्यूटर प्रणाली की अनुशंसा करें ।

इस हेतु उद्यमी को किसी विशेषज्ञ की सलाह भी लेनी चाहिये ।

( x )Total Quality management program – TOM  ( योग गुणवत्ता प्रबन्ध कार्यक्रम विकसित करना  )

अपनी सरचना से TQM सर्वोत्तम व्यवसाय के समान है । इसलिये TOM बनाना उद्यमी की प्राथमिकता होनी चाहिये । टॉम क्लोबुचर के अनुसार TOM वास्तव में एक ” अस्तित्व मुददा ” है । कोई भी कम्पनी जो कि किसी गुणवत्ता प्रक्रिया में संलग्न नहीं है अच्छी श्रेणी में नहीं गिनी जा सकती । यदि उन्होनें उच्च गुणवता का जीवन तथा भाषा सीखना शुरु नहीं किया तो वे व्यवसाय से बाहर हो जायेंगे | ”

TQM के तीन सिद्धांत निम्नलिखित है –

  • उपभोक्ता की पूर्ण संतुष्टि हेतु प्रयास ,
  • उत्पाद तथा सेवाओं में निरंतर सुधार ,
  • प्रत्येक कर्मचारी का सम्पूर्ण योगदान ।

( xi ) Employee Development Plan (कर्मचारी योजना विकसित करना)

किसी भी उपक्रम की सर्वाधिक मूल्यवान धरोहर वहाँ के कर्मचारी होते हैं । इस सम्पति का मूल्यास नहीं होता । कर्मचारियों के संबंध में किसी उद्यमी को निम्नलिखित निर्णय लेने चाहिये –

  • उपक्रम में तकनीकी व अन्य पदों हेतु कर्मचारियों का आवश्यक संख्या ,
  • कुशल कार्य निष्पादन हेतु योग्यताओं , बुद्धिमता तथा अनुभव की आवश्यकता ,
  • भर्ती करने के वे स्रोत जहाँ से आवश्यक स्टाफ उपलब्ध हो सकता है ,
  • उपयुक्त कर्मचारियों के चयन की विधि ,
  • स्टाफ के कार्य निष्पादन , वेतनमान तथा पदोन्नति सम्बन्धी नीतियाँ तथा प्रक्रियाओं का मूल्यांकन ,
  • स्टाफ की सुरक्षा , स्वास्थ्य तथा कल्याण हेतु सुविधाओं का प्रावधान ,
  • पुरस्कार एवं अभिप्रेरण हेतु प्रावधान ।

( xii ) Develop a financial plan (वित्तीय योजना विकसित करना )

वित्तीय योजना उद्यमी की परिचालन योजनाओं मौद्रिक व्यक्त रूप है । वित्त वह साधन है जिससे उपक्रम के बिखरे हुए अंगों को जोड़ा जाता है । वित्त उद्यमी को अधिक प्रभावी ढंग से संप्रेषण करने योग्य भी बनाता है । वित्तीय योजना के चार प्रमुख तत्व होते हैं –

  • एक नकद बजट ,
  • एक आय विवरणिका ,
  • तुलना पत्र , तथा
  • एक लाभ ग्राफ ( सम – विच्छेद चार्ट ) ।

उद्यमी को यह ज्ञात होना चाहिये कि आवश्यक वित्त का अनुमान किस प्रकार लगाया जाये तथा उस अनुमानित वित्त के लिये कोष किस प्रकार तैयार किया जाये । वित्त का अनुमान लगाने से पूर्व उद्यमी को यह जानना आवश्यक होता है कि उसकी क्या करने की योजना है फिर उद्यमी को यह निर्णय करना चाहिये कि उस कोष का कितना अंश निवेशकों से समता पँजी के रूप में तथा साख दाताओं से ऋण पूँजी के रूप में प्राप्त होगा ।


Final Word

दोस्तों इस पोस्ट को पूरा पढने के बाद आप तो ये समझ गये होंगे की Project Formulation In Hindi   और आपको जरुर पसंद आई होगी , मैं हमेशा यही कोशिश करता हूँ की आपको सरल भाषा में समझा सकू , शायद आप इसे समझ गये होंगे इस पोस्ट में मैंने सभी Topics को Cover किया हूँ ताकि आपको किसी और पोस्ट को पढने की जरूरत ना हो , यदि इस पोस्ट से आपकी हेल्प हुई होगी तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं |

Rate this post

2 thoughts on “Project Formulation In Hindi -जाने क्या है Project Formulation हिन्दी में”

Leave a Comment