INCREMENTAL MODEL IN HINDI

इस मॉडल मे client को सभी requirement का पता होता है | और client उस project के लिए wait नहीं करता उसे वह project emergency में चाहिए होता है | क्लाइंट को एक particular टाइम से पहले ही उस project की need होती है | क्लाइंट उस सभी फंक्शनैलिटी को हमारे पास लेकर आता है और कहता है की मुझे शॉर्ट टाइम में इस प्रोजेक्ट को कंप्लीट करना जो पॉसिबल नहीं है |
आपको जो अर्जेंट functionality चाहिए वह हम आपको देंगे और बाकी की जो functionality है वह हम आपको बाद में देंगे | तो हम क्लाइंट को सेटिस्फाई करते हैं उसकी रिक्वायरमेंट fulfill करके |
इसे ही हम incremental मॉडल कहते है इसमें client को immediate work चाहिए होता है |

इसमे हम क्लाइंट को सेटिस्फाई करते हैं उसकी रिक्वायरमेंट फुलफिल करके हम इसमें क्लाइंट की फैसिलिटी को parts में divide कर देते हैं और कुछ necessary parts को complete (कंप्लीट) करके अपने क्लाइंट को सेटिस्फाई कर देते हैं और बाकी काम हम one by one increment करते हुए करते हैं |

When to use Incremental models ?

1. सिस्टम की आवश्यकताएं स्पष्ट रूप से समझी जाती हैं
2. जब किसी उत्पाद की प्रारंभिक रिलीज की मांग होती है
3. जब सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टीम बहुत अच्छी तरह से कुशल या प्रशिक्षित नहीं होती है
4. जब उच्च जोखिम वाली विशेषताएं और लक्ष्य शामिल होते हैं
5. application and product based companies के लिए इस तरह की पद्धति का उपयोग अधिक है

ADVANTAGE OF INCREMENTAL MODEL

* सॉफ्टवेयर जीवन चक्र के दौरान सॉफ्टवेयर जल्दी से उत्पन्न किया जाएगा |
* यह requirements and scope को बदलने के लिए flexible है |
* इसके development stages में बदलाव किया जा सकता है |
* इसमें customer हमारे प्रत्येक stage में respond करता है |
* errors की पहचानना आसान है |

DISADVANTAGE OF INCREMENTAL MODEL

* इसके लिए एक अच्छी योजना बनाने की आवश्यकता है |
* प्रत्येक iteration phase कठोर है और एक-दूसरे को overlap नहीं करता है |
* एक इकाई में किसी समस्या को सुधारने के लिए सभी इकाइयों में सुधार की आवश्यकता होती है और बहुत समय   लगता है |
*यह मॉडल दूसरों की तुलना में महंगा है |

 

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*