Difference Between Private Company And Public Company In Hindi

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Difference Between Private Company And Public Company In Hindi


Difference Between Private Company And Public Company In Hindi  हेल्लो Engineers कैसे हो , उम्मीद है आप ठीक होगे और पढाई तो चंगा होगा आज जो शेयर करने वाले वो Entrepreneurship  के Difference Between Private Company And Public Company के बारे में हैं

तो यदि आप जानना चाहते हैं की Difference Between Private Company And Public Company In Hindi  क्या हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं , और अगर समझ आ जाये तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं |


Difference Between Private Company And Public Company In Hindi

Private और Public Company में अंतर निम्नलिखित हैं :-

 

S.N

Private Company

Public Company

1 सदस्य संख्या : न्यूनतम 2 अधिकतम  50 न्यूनतम 7 अधिकतम ( असीमित , शेयर धारियों की संख्या पर निर्भर )
2 नाम के बाद ‘ प्रायवेट लिमिटेड ‘  लिखाना अनिवार्य है । नाम के बाद ‘  लिमिटेड ‘  लिखाना अनिवार्य है ।
3 यह जनसामान्य से शेयर या डिबेन्चर हेतु योगदान स्वीकार नहीं करती ।  यह जनसामान्य से शेयर / डिबेन्चर । हेतु योगदान लेने हेतु स्वतंत्र होती है |
4 अपने अनुच्छेदों के तहत यह शेयरों के हस्तारण को स्वीकार नहीं करती । शेयरों का हस्तांतरण हो सकता है ।
5 निगमन के तुरंत बाद ही शेयरों का आबंटन किया जा सकता है न्यूनतम योगदान प्राप्त करने के बाद ही शेयरों का आबंटन कर सकता है
6

निगमन के तुरंत बाद ही यह व्यवसाय सुरु कर  सकते है |

प्रारम्भण प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद यह व्यवसाय शुरू कर सकती है |

7  इसे विवरण पत्रिका या उसके आभाव में प्रपत्र देने की जरूरत नहीं होती । में प्रपत्र देना आवश्यक है ।   इसे विवरण पत्र अथवा उसके अभाव में प्रपत्र देना आवश्यक है ।
8 इसे न तो वैधानिक सभा करना आवश्यक है और न ही उसके अभाव में वैधानिक रिपोर्ट ।  इसके लिये वैधानिक सभा बुलाकर तथा रजिस्ट्रार के पास वैधानिक रिपोर्ट देकर तत्पश्चात् सदस्यों को रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य है ।
9 इसमें कम से कम 2 निदेशकों का होना अनिवार्य है । इसमें कम से कम 3 निदेशकों का होना अनिवार्य है ।
10  यह न तो शेयर सर्टिफिकेट जारी कर सकती है और न ही शेयर वारण्ट| कुछ औपचारिकताओं की पूर्ति के  बाद यह शेयर वारण्ट भी जारी कर सकती है ।
11 इसमें निदेशकों का क्रमवार अवकाश प्राप्ति का होना अनिवार्य नही है इसमें निदेशक क्रमवार अवकाश ग्रहण करते है ।
12 केन्द्र सरकार के अनुमोदन के बिना निदेशकों को ऋण दिये जा सकते  हैं | केन्द्र सरकार के अनुमोदन के बिना  निदेशकों को ऋण नहीं दिये जा सकते ।

 


Final Word

दोस्तों इस पोस्ट को पूरा पढने के बाद आप तो ये समझ गये होंगे की Difference Between Private Company And Public Company In Hindi और आपको जरुर पसंद आई होगी , मैं हमेशा यही कोशिस करता हु की आपको सरल भासा में समझा सकू , शायद आप इसे समझ गये होंगे इस पोस्ट में मैंने सभी Topics को Cover किया हूँ ताकि आपको किसी और पोस्ट को पढने की जरूरत ना हो , यदि इस पोस्ट से आपकी हेल्प हुई होगी तो अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं|

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