Factors Affecting Entrepreneurship Development In Hindi  (उद्यमिता विकास को प्रभावित करने वाले कारक)

उद्यमशीलता चार अलग-अलग कारकों से प्रभावित होती है: आर्थिक विकास, संस्कृति, तकनीकी विकास और शिक्षा
(economic development, culture, technological development and education.) ।

उन क्षेत्रों में जहां ये कारक मौजूद हैं, आप मजबूत और लगातार उद्यमशीलता वृद्धि देखने की उम्मीद कर सकते हैं।

Economic Factors (आर्थिक कारक)

आर्थिक वातावरण उद्यमिता पर सबसे प्रत्यक्ष और तत्काल प्रभाव डालता है।
यह संभावना है क्योंकि लोग आवश्यकता के कारण उद्यमी बन जाते हैं जब कोई अन्य नौकरी नहीं होती है या अवसर
के कारण नहीं होती है।

उद्यमशीलता के विकास को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक निम्नलिखित हैं:

1. Capital or Finance (पूंजी)

  • किसी भी enterprise  की  स्थापना के लिए पूंजी (finance) , उत्पादन के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक हैं |
  • किसी भी project  में अगर हम ज्यादा पैसे invest करेंगे तो हमें जादी profit  होगी |
  • इसलिए finance को business या industry का lubricant भी कहा जाता हैं |
  • पूंजी की कमी business  में कहीं ना कहीं business process  को बाधित करती है |

फ्रांस और रूस ने उदाहरण दिया कि कैसे औद्योगिक गतिविधियों के लिए पूंजी की कमी ने , उद्यमशीलता की प्रक्रिया
(process ) को बाधित किया और पूंजी की पर्याप्त आपूर्ति ने इसे बढ़ावा दिया।

2 . Labor (श्रमिक)

सही प्रकार के श्रमिकों की आसान उपलब्धता भी उद्यमिता को प्रभावित करती है। श्रम की मात्रा के बजाय
गुणवत्ता उद्यमशीलता के उद्भव (emergence) और विकास को प्रभावित करती है। एक कुशल यातायात
का साधन और अपने श्रमिकों के रहने के लिए अवसंरचनात्मक सुविधाएं (infrastructural facilities)
प्रदान करके श्रमिक गतिहीनता की समस्या को हल किया जा सकता है। श्रम की गुणवत्ता की मात्रा एक
और कारक है जो उद्यमशीलता के उद्भव (emergence) को प्रभावित करता है। कम लागत वाले श्रम के संभावित
लाभों को श्रम गतिहीनता केघातक प्रभावों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा के विचार
श्रम गतिशीलता को बाधितकरते हैं। इसलिए, उद्यमी अक्सर पर्याप्त श्रम को सुरक्षित करने के लिए कठिनाई पाते हैं।

3. Raw Materials (कच्चा माल )

किसी भी औद्योगिक गतिविधि को स्थापित करने के लिए कच्चे माल की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है
कच्चे माल के अभाव या बिना के,न तो कोई उद्यम स्थापित किया जा सकता है और न ही एक उद्यमी का
उदय हो सकता है |

यह उत्पादन के लिए आवश्यक मूल अवयवों में से एक है। कच्चे माल की कमी उद्यमी पर्यावरण पर प्रतिकूल
प्रभाव डाल सकती है। कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति के बिना कोई भी उद्योग ठीक से काम नहीं कर सकता
है और प्रतिकूल रूप से उद्यमशीलता का उदय प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है।

वास्तव में, कच्चे माल की आपूर्ति स्वयं प्रभावित नहीं होती है, लेकिन अन्य अवसर स्थितियों के आधार पर प्रभावशाली
हो जाती है ये परिस्थितियाँ जितनी अधिक अनुकूल होंगी, उतनी ही अधिक मात्रा में कच्चे माल का उद्यमी पर प्रभाव
पड़ता है

4. Market (बाजार)

उद्यमिता के विकास के लिए market और marketing की भूमिका और महत्व बहुत महत्वपूर्ण है।
आधुनिक प्रतिस्पर्धी दुनिया में कोई भी उद्यमी बाजार और विभिन्न विपणन तकनीकों के बारे में नवीनतम
ज्ञान के अभाव में जीवित रहने के बारे में नहीं सोच सकता है।

बाजार का आकार और संरचना दोनों अपने तरीके से उद्यमिता को प्रभावित करते हैं।
उद्यमिता के लिए market एक ऐसा platform हैं जहाँ buyer और seller दोनों मिल कर किसे उत्पाद की
खरीदी और बिक्री होती है |

5. Infrastructure (बुनियादी ढांचे)

>उद्यमशीलता का विस्तार ठीक से विकसित संचार और परिवहन सुविधाओं को निर्धारित करता है। यह न केवल
बाजार को बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि व्यवसाय के क्षितिज का भी विस्तार करता है। उदाहरण के लिए,
भारत में पोस्ट और टेलीग्राफ प्रणाली की स्थापना और सड़कों और राजमार्गों का निर्माण। इसने 1850 के दशक
में काफी उद्यमशीलता गतिविधियों में मदद की।

उपरोक्त कारकों के अलावा, व्यापार / व्यावसायिक संगठन, व्यावसायिक स्कूल, पुस्तकालय आदि जैसी संस्थाएँ
भी अर्थव्यवस्था में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। आप इन
निकायों से अपनी इच्छित सभी जानकारी एकत्र कर सकते हैं। वे संचार और संयुक्त कार्रवाई के लिए एक मंच
के रूप में भी कार्य करते हैं।

INDIVIDUAL FACTOR (व्यक्तिगत कारक)

व्यक्तिगत कारक भी business  को प्रभाव करती है जिसके  तीन निम्नलिखित घटक है |

उद्यमिता के विकास को प्रभावित करने वाले INDIVIDUAL FACTOR निम्लिखित हैं :-

1 . Occupation Background  (व्यवसाय पृष्ठभूमि)

  • जो भी entrepreneur  है वह  किस background  से belong  करता  है | क्या वह  पहले किसी industry  में कार्य कर चूका हैं या इससे पहले कोई और भी business कर चूका हैं   , अगर हाँ तो  उसको उस बिजनेस से जुड़े बहुत सारी जानकारी उसके दिमाग में होगी उसको उस चीज knowledge  होगा तब वो किसे भी  बिजनेस में काफी आगे जा सकता है |

2 . Educational  Background  (शिक्षा पृष्ठभूमि)

  • जो भी entrepreneur  है वह कितना पढ़ा लिखा हैं |
  • एक m.b.a   का student  जितना  अच्छा मैनेजमेंट कर सकता है वो  m.com  या b.s.c  का स्टूडेंट नहीं कर सकता|

3 . Educational  Background  (पैतृक पृष्ठभूमि)

  • जो भी entrepreneur  है उसका family background कैसा हैं क्या उसके parents किसी बिज़नेस में हैं | अगर ऐसा हैं तो वो अपने family का ही business आगे लेकर जा सकता हैं | main goal उसका खुद के business मे होगा पर वह अपने family business में भी हाथ बटायेगा |

SOCIAL  FACTOR (सामाजिक कारक)

प्रत्येक समाज में कुछ सांस्कृतिक प्रथाएं और मूल्य होती हैं जो व्यक्ति के कार्यों को प्रभावित करती है|

भारत में सामाजिक गतिशीलता से हमारा तात्पर्य एक जाति से दूसरे जाति में जाने की स्वतंत्रता से है | मतलब छोटे वर्ग के लोग उच्चे वर्ग के साथ मिल कर काम नई क्र सकते थे |

जाति व्यवस्था एक ऐसे व्यक्ति को अनुमति नहीं देती जो उच्च जाति में जाने के लिए एक निम्न श्रेणी का हो अगर उसे ऊंची जाति में जाना है तो वह उचित जा तो उसे उच्च जाति में ही पैदा होना पड़ेगा |

यह सभी प्रथाएं और मान्यताएं पहले समय में हुआ करती थी |

व्यक्तिगत कारक भी business  को प्रभाव करती है जिसके  तीन निम्नलिखित घटक है :-

1  . Educational  Background  (पारिवारिक पृष्ठभूमि)

अगर आप का फैमिली बैकग्राउंड किसी बिजनेस में हैं  तो आप भी अपने बिजनेस को आगे लेके चल सकते हैं फर्क बस यह रहेगा कि आप नए-नए तकनीकों की मदद से अपने बिजनेस को प्रमोट करेंगे |  फैमिली बिजनेस का एक ड्रॉबैक भी है। उदाहरण :-

फैमिली बिजनेस का एक ड्रॉबैक भी है अगर किसी फैमिली में कोई जमीन 4 लोगों में  बराबर बराबर विभाजित है अगर उसमें से 3 लोग कहीं बाहर कमाते हैं ,और 1 लोग उस जमीन पर मेहनत  कर अपनी रोजी-रोटी चलाता है तो फसल करने वाले को अपना पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा कि वह क्योकि बराबर – बराबर भागों में बांटा है इसलिए उस जमीन का लाभ  4 बराबर बराबर भागों में ही बाटना पड़ेगा |

2  . Attitude Of Society (समाज का दृष्टिकोण)

एक entrepreneur के ऊपर समाज का दृष्टिकोण भी काफी निर्भर करता है |

अगर उसके समाज में बिज़नस को लेकर सभी लोग जागरूक है तो कहीं न कहीं  वह भी  वह भी entrepreneur को लेकर जागरूक रहेगा |

उदाहरण :-  यह कहा जाता है, कि रूस में, उन्नीसवीं शताब्दी में, उच्च वर्ग उद्यमियों को पसंद नहीं करते थे। उनका मानना ​​था कि  भूमि का उत्पादन भगवान के आशीर्वाद के अलावा कुछ नहीं था। लेकिन समय बदलता गया और कुछ उच्च वर्ग के लोगों ने business सुरु किया और उन्हें काफी फ़ायदा भी हुआ ,  इन्हीं सभी चीजों को देखकर वहां के समाज में काफी परिवर्तन आया और सभी लोग business को लेकर काफी प्रोत्साहित हुए |

 

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